दुनिया को बस दुनिया समझो- शुचि ‘भवि’

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दुनिया को बस दुनिया समझो
क्यों इसको तुम अपना समझो

बाक़ी जग में सब झूठा है
सच्चा साथ ख़ुदा का समझो

ख़ुशी न हो जिसके आने पर
वो आना भी जाना समझो

उसमें भी है सूरज पूरा
चाँद न उसको आधा समझो

निभे नहीं जो एक जन्म क्या
जन्मों का वो नाता समझो

मतलब के हैं जग के रिश्ते
असली हरि से रिश्ता समझो

दिल की बातें दिल में रखना
बाहर सब न अच्छा समझो

जिसकी ख़ातिर जान लुटाई
उसका ये इतराना समझो

सागर ‘भवि’ खारा ही होगा
इतना तो तुम गुनिया समझो

शुचि ‘भवि’

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