निभाने से क्या फाय़दा- देवएकता

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बेवजह दिल लगाने से क्या फाय़दा
दिल को यूँ दुखाने से क्या फाय़दा

बेवफाई करेगा ये फ़ितरत इसकी
झूठी बातें बनाने से क्या फाय़दा

कल सुबह जाने क्या रंग लाये नया
आज से दिल जलाने से क्या फाय़दा

इस मुहब्बत की लगती है बाजार भी
बेवफा से बिक जाने से क्या फाय़दा

दिख रहा है तेरा कद़ जैसे ताड़ हो
तेरी सच्चाई छुपाने से क्या फाय़दा

सीख ले तू नफ़ा- नुकसान “एकता”
प्यार बेव़जह निभाने से क्या फाय़दा

-देवएकता