ये आभासी रिश्ते- पिंकी दुबे

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अकेलेपन का दर्द वो
क्या जाने जो भीड़ में रहता हो
दिखावा ही सही पर…
कुछ रिश्तों का होना भी जरूरी है
जैसे हाल ठीक ना होनें पर भी, आप का
पूछे जाने पर कहना ठीक हूँ,
ये आभासी रिश्ते कुछ दे न दें…
कई बार किसी के
जीने की वज़ह तो बन ही जातें हैं,
जैसे मंदिर में जलता दिया
मन्नतों में बंधे धागे…
आपके उम्मीदों को पुख़्ता करतें हैं
ठीक वैसे ही
किसी के दिखावे भर का साथ ही
किसी की पूरी उम्र के लिए
जीने की वज़ह बन जाता है

– पिंकी दुबे