जीवन में दर्द जो समाया है- असर आशुतोष

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जीवन में दर्द जो समाया है,
गीतों में आज छलक आया है।
यादों की डोली को, ढो रहे कहारों ने
चिन्तन के पृष्ठों पर चरण चिन्ह छोड़े हैं।
रात के अंधेरे में चमकीले तारों ने
देख लिए उड़ते कुछ, बादल के घोड़े हैं।
सागर को किसने झुलसाया है,
गीतों में आज छलक आया है….

बहकी सी दुनियां है, शाम की निगाहों में,
अंधियारी रातें हैं, बर्फीली बांह लिए।
टूटे कुछ सपने हैं, पलकों की छाहों में
इक उदास दीपक है,भभक रही आह लिए।
सीमाएं तौल रही छाया है,
गीतों में आज छलक आया है….

हास की लकीरें हैं, किस्मत की होठों पर,
आंखें भी अर्थों के सागर में डूबी हैं।
अंतर के प्रहसन का पटाक्षेप कोठों पर,
इसलिए हवाएं भी जीवन से ऊबी हैं।
माटी की फिक्र ने रूलाया है,
गीतों में आज छलक आया है।

अनजानी राहों में, नया कोई गीत चले,
धूप का डिठौना हो, छांव भी लजाई हो।
भावनाएं जलती हो, पहर-पहर बीत चले
शब्दों की डोली में पीड़ा अलसाई हो।
जीवन ने रूप जो सजाया है,
गीतों में आज छलक आया है….
-असर आशुतोष