दीपोत्सव: शुभ योग में पूजन करने से प्राप्त होगी माँ लक्ष्मी की कृपा

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लंका पर विजय के बाद प्रभु श्रीराम माता सीता एवं लक्ष्मण चौदह वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या लौटे तो उनके आगमन की खुशी में पूरे अयोध्या राज्य में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया था। जिसके बाद से हर वर्ष पूरे भारतवर्ष में दीपोत्सव मनाया जाता है। इस दिन धन-धन्य, सुख-समृद्धि की कामना से माँ लक्ष्मी, प्रथम पूज्य श्रीगणेश तथा विद्यादायिनी माँ सरस्वती व देवता कुबेर का पूजन किया जाता है। माँ लक्ष्मी का पूजन करने से माँ लक्ष्मी भक्त जे घर की दरिद्रता दूर कर धन रूप में वास करती है। इसलिए दिवाली की रात सभी भक्त ये प्रयास करते हैं कि माँ लक्ष्मी का आगमन उनके घर पे हो और माँ लक्ष्मी उनके घर में सदा के लिए वास करें।
इस बार दीपावली कई शुभ संयोगों के साथ मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार कई वर्षों बाद दीपावली मालव योग, त्रिग्रही योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, कुमार योग, लक्ष्मी योग के साथ मनाई जाएगी। यह सभी योग धन्य—धान्य, एश्वर्य एवं व्यापार में अपार वृद्धि करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार गई वर्षों बाद पंच दिवसीय दीपोत्सव पर त्रिग्रही योग भी बन रहा है। इसमें सूर्य, चंद्रमा तथा शुक्र ग्रह तुला राशि में होंगे। लक्ष्मी पूजन इस शुभ संयोग में होने से धन, एश्वर्य, व्यापार में अपार वृद्धि होगी। दीपावली के दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ समय माना जाता है। जिसके अधिकांश लोग शाम के वक्त प्रदोषकाल में महालक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस बार शाम 5:19 से रात 7:53 बजे तक 2 घंटे 38 मिनट का प्रदोषकाल रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 59 साल बाद दिवाली पर कई लाभकारी संयोग बन रहे हैं। गुरु और शनि का दुर्लभ योग बन रहा है। दिवाली पर देव गुरु बृहस्पति, मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में रहेंगे। वहीं त्रिग्रही और आयुष्मान, सौभाग्य योग के कारण दीपावली व्यापार, राजनीति और नौकरी करने वालों के लिए अधिक मंगलकारी होगी। उद्योग जगत को दिवाली पर ग्रहों का शुभ फल प्राप्त होगा। व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर दिवाली पूजन के कई मुहूर्त हैं।
घरों पर दिवाली के पूजन का मुहूर्त आज बुधवार को सायं 5:27 बजे से 8:06 बजे है। यह अवधि 1 घंटा 59 मिनट यानी लगभग दो घंटे रहेगी। अमावस्या तिथि 6 नवम्बर मंगलवार को रात में 10 बजकर 07 मिनट से लग रही है, जो 7 नवम्बर बुधवार को रात में 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय से ही मिल रहा है। साथ ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग है। प्रदोष काल शाम 5:19 से 7:53 बजे तक रहेगा। पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन 7:16 बजे से लेकर 9:33 तक, कुम्भ स्थिर लग्न दिन 1:26 से 2:57 तक, वृष स्थिर लग्न शाम 6:02 से 7:58 तक रहेगा।