आरबीआई ने घटाया रेपो रेट, ब्याज दर में आएगी कमी

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक समीक्षा की बैठक में रेपो रेट 0.25 बेसिस प्वाइंट घटा दिया है। रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर (रेपो रेट) 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट कम होने से होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन या लघु उद्योगों के लिए कर्ज की दरों में कमी आएगी। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2020 के लिए जीडीपी का लक्ष्य 7.4 फीसदी दिया है। रिजर्व बैंक के दरें घटाने के बाद रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी हो जाएगी। रिजर्व बैंक ने अपना मत न्यूट्रल कर लिया है। मॉनटरी पॉलिसी कमेटी के 6 सदस्यों में से 4 ने दरों को घटाने के पक्ष में वोट दिया।
इसके अलावा अर्बन कॉपोरेटिव बैंक के लिए रिजर्व बैंक ने एक बड़ी संस्था बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा किसानों के लिए बिना कुछ गिरवी रखे अब 1.6 लाख रुपए तक लोन मिलेगा। पहले ये लिमिट 1 लाख रुपए थी जिसे अब 60 हजार रुपए बढ़ा दिया गया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक जनवरी से मार्च के बीच महंगाई 2.8 फीसदी रहेगी। वहीं अप्रैल से सितंबर 2019 के बीच महंगाई 3.2 फीसदी से 3.4 फीसदी रहने की संभावना है। रिजर्व बैंक के इस अनुमान से आगे भी ब्याज दरें घटने की संभावना बढ़ गई है।
अभी रेपो रेट 6.50 फीसदी है जिसे आरबीआई ने घटाकर 6.25 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट पर ही आरबीआई बैंकों को एक दिन के लिए उधार देता है। इस रेट के घटने से बैंकों का कर्ज सस्ता हो जाता है। केंद्रीय बैंक ने पिछली तीन मौद्रिक समिति बैठक में पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे पहले इस वित्त वर्ष में दो बार 0.25-0.25 फीसदी की वृद्धि की गई थी। दिसंबर की बैठक के बाद आरबीआई ने कहा था कि अगर महंगाई में तेजी का जोखिम नहीं बढ़ता है तो इसमें कटौती की जाएगी। जरूरी वस्तुओं और तेल के दाम में थोड़ी कमी आने से खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2018 में 2.19 फीसदी पर आ गई, जो 18 महीने का न्यूनतम स्तर है। थोक महंगाई दर दिसंबर में 3.80 फीसदी रही जो आठ महीने के निचले स्तर पर है।