भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

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भारत सब देशों से न्यारा
जन गण मन का है अति प्यारा

जाति धर्म हैं भिन्न हमारे
फिर भी मिलकर रहते सारे
कर्मवीर हम हैं रखवारे
सबका सबसे भाईचारा
भारत सब देशों से न्यारा

पर्व बिखेरें छटा निराली
होली ईद कभी दीवाली
दिल ख़ुशियों से रहें न खाली
दीन-दुखी का बनें सहारा
भारत सब देशों से न्यारा

गंगा यमुना नीर बहातीं
धरती माता को सरसातीं
कलियाँ फूल बनी मुस्कातीं
वीरों ने भी सदा सँवारा
भारत सब देशों से न्यारा

बच्चों की गूँजें किलकारी
लगे हमें फूलों की क्यारी
भारत भूमि बनी महतारी
गोद मिली सौभाग्य हमारा
भारत सब देशों से न्यारा

यहाँ कृष्ण ने जन्म लिया था
गीता का उपदेश दिया था
शंकर ने सब ज़हर पिया था
संकट से देवों ने तारा
भारत सब देशों से न्यारा

उत्तर में हिमराज विराजे
बहे गंग कल-कल स्वर साजे
स्वर्ग हिन्द में स्वयं विराजे
सागर ने भी पाँव पखारा
भारत सब देशों से न्यारा

रहा कभी सोने की चिड़िया
लगता था जादू की पुड़िया
भोला भाला जैसे गुड़िया
धन वैभव था अपरम्पारा
भारत सब देशों से न्यारा

वीरों की यह कर्मभूमि है
ऋषिमुनियों की तपोभूमि है
देवों की भी जन्मभूमि हैं
मुक्त कंठ से वेद उचारा
भारत सब देशों से न्यारा

भारत पर बलिहारी जाऊँ
जन्म जन्म तक इसको पाऊँ
शान हमारी मान बढाऊँ
जाने इसे विश्व यह सारा
भारत सब देशों से न्यारा

मुल्क पड़ोसी आँख दिखाये
सरहद पर आ धाक जमाये
खोटी नीयत हमे न भाये
गुस्से में चढ़ता है पारा
भारत सब देशों से न्यारा

दुश्मन आया था मतवाला
तन अति गोरा मन था काला
लात मार कर गया निकाला
ख़ाक-मिला जिसने ललकारा
भारत सब देशों से न्यारा

सुरभित पवन मन्द गति डोले
साँस-साँस में खुशबू घोले
स्वर्णिम भोर द्वार नव खोले
ख़ुशियों का फैला उजियारा
भारत सब देशों से न्यारा

चंदन माटी स्वर्ण उगाये
महिमा शब्दों में न समाये
सारा जग ही गाथा गाये
गूँजें जय भारत का नारा
भारत सब देशों से न्यारा

ढाई आखर ही हम जाने
होठों पर नित रहें तराने
बिना बात के रार न ठाने
बहे प्रेम की अविरल धारा
भारत सब देशों से न्यारा

डोर प्रेम की टूट न पाये
कोई अपना छूट न पाये
दुश्मन फिर से लूट न पाये
होगा नही पुनः बंटवारा
भारत सब देशों से न्यारा

-स्नेहलता नीर