माँ शारदे, माँ शारदे- कुंवर उदय

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माँ शारदे माँ शारदे,
माँ शारदे माँ शारदे
छा रहा सब जग अंधेरा,
मां तमस से तार दे,
शारदे माँ शारदे…
कर उज़ाला भर उज़ाला,
माँ तेरा उपकार दे,
शारदे मां शारदे…
तू अचल सांची माँ लक्ष्मी,
संपदा उपहार दे,
शारदे माँ शारदे…
माँ तू ही सब जग की मेधा,
ज्ञान का उज़ियार दे,
शारदे माँ शारदे…
तू धरा तेरी गोद में माँ,
अब मुझे भी प्यार दे,
शारदे माँ शारदे…
माँ तू पुष्टि पुष्ट कर मम,
चेतना को धार दे,
शारदे माँ शारदे…
माँ तू गौरी, सब कपट,
मम धारणा को क्षार दे,
शारदे माँ शारदे…
तू ही तुष्टि बनके, माँ मेरी,
व्यर्थता को सार दे,
शारदे माँ शारदे…
तू प्रभा माँ मम हृदय को,
निष्कपट संचार दे,
शारदे माँ शारदे…
तू धृति मम धारणा बन,
एक नया आकार दे,
शारदे माँ शारदे…
छा रहा सब जग अँधेरा,
माँ तमस से तार दे,
शारदे माँ शारदे…

-कुँवर उदय
(साहित्य किरण मंच के सौजन्य से)