बेवफा हो गया वो- स्नेहलता नीर

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बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर
चल दिया बेरहम मेरा दिल तोड़कर

कर यकीं अज़नबी पर किया इश्क था
आज पछता रही बेसबब ज़ख्म पा
क्या सिला है मिला रब्त ये जोड़कर
बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर

तल्ख़ अल्फ़ाज़ सुन कर ज़हर सा पिया।
दीं सदाएँ बहुत अनसुना कर दिया
करके रुसवा गया आज मुँह मोड़कर
बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर

पैरहन सा बदलता वो महबूब है
क्या हुनर है दिया तूने रब खूब है
बाँटता दर्द फिरता वो यूँ होड़कर
बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर

ले गया है वो सब कुछ मेरा साथ में
वश नहीं कुछ रहा है मेरे हाथ में।
सोचती हूँ उसे रोक लूँ दौड़कर
बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर

नीर बन बर्फ सी ख़ुद को पिघलाऊँ मैं
आग के कर हवाले या जल जाऊँ मैं
या मरूँ मैं सनम अपना सर फोड़कर
बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर

-स्नेहलता नीर