Sunday, August 25, 2019
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मात मुश्किलों को दे दो तुम- स्नेहलता नीर

विकट पंथ है रोके तूफ़ाँ, जाना तुमको पार। मात मुश्किलों को दे दो तुम, नहीं मानना हार। चिंतित चित मत करो बावरे, मन में धर लो...

मन के दर्पण में- स्नेहलता नीर

हुआ प्रफुल्लित रोम-रोम है, अबकी सावन में। प्रियतम का आनन दिखता है, मन के दर्पण में। प्यार भरी वो मीठी बतियाँ याद बहुत आतीं। छुवन भरा अहसास...

मेघों ने सन्देश सुनाया- स्नेहलता नीर

चातक ने जब आवाहन कर, छेड़ा सरगम स्वर मल्हार का। मेघों ने सन्देश सुनाया , पावस की पहली फुहार का।। काले, भूरे बादल गरजे, चपला चम चम चमक बड़ी...

सुख-दुख में रहते साथ प्रिय- रुचि शाही

अब संभाल न पाऊँ मैं तुमको हाथों से छूट रहे है हाथ प्रिये। गए रात बहुत मैं रोती रही सुध-बुध अपनी खोती रही सहलाते हुए उर के घावों...

हर क़दम पर जब- स्नेहलता नीर

हर क़दम पर जब जमाने से मिले छल तब अटल विश्वास ने बदला धरातल साँच को क्या आँच सब बातें पुरानी जान दे कीमत उसे पड़ती चुकानी झूठ...

है यही चिंतन मनन- स्नेहलता नीर

दुख भरी क्यों ज़िन्दगी, क्यों हो रहा नैतिक पतन। हैं यही मन की व्यथाएँ, है यही चिंतन मनन प्रीत की क्यों पावनी, बहती नहीं निर्मल नदी नेकियाँ...

प्रीत की चाह लिये- श्वेता सिन्हा

मदिर प्रीत की चाह लिये हिय तृष्णा में भरमाई रे जानूँ न जोगी काहे सुध-बुध खोई पगलाई रे सपनों के चंदन वन महके चंचल पाखी मधुवन चहके चख पराग बतरस...

प्रजातंत्र के पथ पर भ्रम का, घना कुहासा है- स्नेहलता नीर

वादे करके हर दल देता, रोज़ दिलासा है।प्रजातंत्र के पथ पर भ्रम का, घना कुहासा है। किस पर करें यक़ीन, किसी को समझ नहीं आता।बदलूँगा...

बेवफा हो गया वो- स्नेहलता नीर

बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर चल दिया बेरहम मेरा दिल तोड़कर कर यकीं अज़नबी पर किया इश्क था आज पछता रही बेसबब ज़ख्म पा क्या सिला है...

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