Sunday, February 17, 2019
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वासंती दोहे- स्नेहलता नीर

फूले टेसू-मोगरा, फूल गयी कचनार। गेंदा चंपा खिल गये, फूला हरसिंगार।। बेला, जूही, केतकी, फूले लाल गुलाब। फूल गयी गुलदाउदी, दिल में जागे ख़्वाब।। सेंवल सरसों भी खिले,...

दोहे- विश्वास वर्धन गुप्त

सूरज धनु को छोड़ के, मकरी करें प्रवेश। जनमन के उत्साह का, दिखता नव परिवेश।। पच्चीस दिनी धनु रहें, पन्द्रह मकर समान। चिल्ला जाड़े के यहाँ, दिन...

दोहे- स्नेहा सिंह

निर्धनता सब दूर हो,फूले फले किसान। मेरा देश महान हो, दे दो प्रभु वरदान।। • • • प्रेम सुधा का सब करें, दुनिया में रसपान। बैर मिटे सब...

सोनिया वर्मा के दोहे

कागा, कोयल बन फिरें, बदल शहर में रूप। पहचानें कैसे कहो, मौनी साधु अनूप।। ● ● ● कच्चा धागा ही कहे, जिसको ये संसार। छुपा हुआ उस में...

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