Monday, June 17, 2019
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वासंती दोहे- स्नेहलता नीर

फूले टेसू-मोगरा, फूल गयी कचनार। गेंदा चंपा खिल गये, फूला हरसिंगार।। बेला, जूही, केतकी, फूले लाल गुलाब। फूल गयी गुलदाउदी, दिल में जागे ख़्वाब।। सेंवल सरसों भी खिले,...

बसंत- श्वेता राय

आसमान बरसा रहा है प्रेम खिलखिला रही है दूब खोल पट मिट्टी का सुनो! मेरे रूठे प्रेमी! तुम भी बढ़ाओ तपिश अपने प्रेम की कि शिशिर से सुसुप्त पड़ा हमारा साथ बौरा...

माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस बसंत पंचमी, शुभ मुहूर्त में करें...

सनातन धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के आते ही ऋतु परिवर्तन होने लगता है।...

ये बसंत की मधुर ऋतु प्रिय- श्वेता राय

ये बसंत की मधुर ऋतु प्रिय! मन बहकाने आई है फूलों ने भौरों पर अपने सौरभ का जादू डाला मस्त हुआ ये मौसम जैसे पीली यौवन की हाला गर्म हवाएं छूकर सबका तन दहकाने आई...

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