Sunday, August 18, 2019
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बो दिये हैं खेत में अपने उजाले- शीतल वाजपेयी

एक दिन सूरज उगाकर दूर कर दूँगी अँधेरा, आज मैंने बो दिये हैं खेत में अपने उजाले आस औ विश्वास के जल से इसे सीचूँगी हर...

जो मिल गया किरदार- शीतल वाजपेयी

वो जिसका नूर आँखो में उजाला बन के आया है उसी ने चाँद-तारे टाँक के अम्बर सजाया है भला ये कैसे तय होगा कि हम में...

कतरा-कतरा धूप- शीतल वाजपेयी

कतरा-कतरा धूप बटोरा करता था जो राहों से, आज उसी ने अपने दम पर अपना सूरज उगा लिया जीवन की धारा कब किसकी आशा के अनुकूल...

कभी खुद से मिले क्या- शीतल वाजपेयी

मिले हो हर किसी से पर कभी खुद से मिले क्या? कभी पूछा है खुद से हैं कोई शिकवे-गिले क्या? कभी तनहाइयों में बैठ कर खुद...

हम अपनेपन से दूर हुए- शीतल वाजपेयी

सुविधाओं के लालच में हम अपनेपन से दूर हुये मिले बनावट के सब रिश्ते जब बचपन से दूर हुये बस इक छोटे से कमरे में हम...

प्रेम का दीपक जला लूँ- शीतल वाजपेयी

बस गई जो छवि हृदय में प्रीति से उसको सजा लूँ याद का मंदिर बना कर प्रेम का दीपक जला लूँ कर रही हूँ मैं समर्पित...

कुछ पूनम की रातें हैं तो कुछ अँधियारी रातें हैं- शीतल...

कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हें, कुछ ख़ारी सी बातें हैं। कुछ पूनम की रातें हैं तो कुछ अँधियारी रातें हैं। आँचल के हर एक छोर पर...

प्रेम का दीपक जला लूँ- शीतल वाजपेयी

बस गई जो छवि हृदय में प्रीति से उसको सजा लूँ याद का मंदिर बना कर प्रेम का दीपक जला लूँ कर रही हूँ मैं समर्पित...

जिनकी यादों को भुलाने में जमाने लग गये- शीतल वाजपेयी

जो थे सच के गीत गाते यूँ ठिकाने लग गये आजकल सब झूठ का परचम उठाने लग गये फिर उन्हीं का जिक्र मेरे सामने छेड़ा गया, जिनकी...

अभी जीत की पूरी संभावना है- शीतल वाजपेयी

ये माना कि तम है, अँधेरा घना है मगर दीप की अपनी प्रस्तावना है ये जीवन की राहें तुम्हें ही बुलायें सुबह-शाम तुमको ही देती सदायें जो सुन...

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