Monday, May 27, 2019
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Tag: साहित्य

हवाओं से पैगाम लिखवाती- अनिता सैनी

ह्रदय में करुण रागिनी सांसे विचलित कर जाती मिटे माटी के लाल क्यों सुकून की नींद आ जाती? हाहाकार गूंज रहा कण-कण में स्मृति दौड़ आ जाती वेदना असीम ह्रदय...

सुप्रसिद्ध साहित्यकार कृष्णा सोबती का निधन

हिंदी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार कृष्णा सोबती का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 94 वर्ष की थीं। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक...

झील के किनारे- रश्मि किरण

झील के किनारे संग संग आ पीया चल थक के तेरे कांधे पे सर रख दूं जी लूं पल देखो कैसे तक रहा चांद फलक के कोने से उसी पल...

शान्ति संवाहिका निशा- डॉ राम कुमार झा

रोशनी ओझल हुई सूरज की आधी धरा, थकी हारी कुछ न कुछ लाभालाभ समेटे कमायी अपनी मेहनताने आगमन गोधूलि, समेटता महकमा ख़ुद की रचायी दिनभर की विहँसती महफ़िल, शाम की अँगराईयों में...

मौसम हूं सर्दी का- अनन्त मिश्रा

मैं मौसम हूं सर्दी का  लोग समझते हैं  चिन्ह हूं बेदर्दी का  सबके...

द्वंद- किरण बरनवाल

बड़ी-बड़ी आँखे, दूर तक मौन पसरी हुई महसूस हो रही थी, बिखेरे बिखरे छितराए केश, गहरे लाल रंग की साड़ी, माँग से मस्तक तक...

यादगार नववर्ष- रश्मि किरण

बात उस समय की जब मैं 8- 10 साल की थी ।बच्ची के कदम बड़ी बच्ची बनने की और चल पड़े थे घर और...

साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा

साहित्य अकादमी ने आज 24 भाषाओं में अपने वार्षिक साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। सात कविता संग्रह, छह उपन्यास, छह कहानी...

इंतज़ार नाम का कोई शब्द- जयश्री दोरा

एक इंतज़ार स्टेशन पर जानते हुए कि कोई आने वाला नहीं है रोज़ टूटती हैं उम्मीदें स्टॉल पर पन्ने फड़फड़ाते हैं किसी पन्ने में दर्ज़ होगा इंतज़ार नाम का कोई...

जिनकी यादों को भुलाने में जमाने लग गये- शीतल वाजपेयी

जो थे सच के गीत गाते यूँ ठिकाने लग गये आजकल सब झूठ का परचम उठाने लग गये फिर उन्हीं का जिक्र मेरे सामने छेड़ा गया, जिनकी...

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