Sunday, February 24, 2019
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क्या हुआ- सूरज राय सूरज

कोने में घर के मकड़ी के जालों का, क्या हुआ अनसुलझे ज़िंदगी के सवालों का क्या हुआ दिल के चमन के, पत्ते तलक खौफ़जदा हैं उन हसरतों...

ये रास्ते कभी तो सुनसान रहे होंगे- सूरज राय सूरज

क़दमों की आहटों से अंजान रहे होंगे ये रास्ते कभी तो सुनसान रहे होंगे आँखों से लाश की, यूँ आँसू नहीं निकलते मुर्दा बदन में, ज़िंदा अरमान...

दे लव यू- सूरज राय सूरज

साहब अपने ये मोबाइल वापस ले लीजिए, ये हमें नहीं चाहिए। आंखों में आंसू लिए एक बुज़ुर्ग दंपत्ति ने अपने दो मोबाइल निकालकर कंपनी के...

कोरे काग़ज़ पे- सूरज राय सूरज

भाई ये मेरे ख़ाते-बही किसलिये कोरे काग़ज़ पे मेरे सही किसलिये सारे किरदार थे पूरे-पूरे मगर ये कहानी अधूरी रही किसलिये पंख काटे मेरे बाज़ दर पे खड़ा फिर...

जाने क्यों- सूरज राय सूरज

सिसकती है मेरी कश्ती मेरी पतवार जाने क्यों कोई तो है बुलाता है मुझे उस पार जाने क्यों पड़ोसी को पता है सब मेरी तन्हाई से...

ज़िंदंगी जैसे कि- सूरज राय सूरज

ख़्वाहिशें, टूटे गिलासों-सी निशानी हो गई। ज़िंदंगी जैसे कि, बेवा की जवानी हो गई।। कुछ नया देता तुझे ए मौत, मैं पर क्या करूँ ज़िंदगी की शक्ल...

शायरी नहीं होती- सूरज राय सूरज

आँख में गर नमी नहीं होती । सच कहें! शायरी नहीं होती ।। वो तो क़िरदार है सन्दल, वरना सांप की दोस्ती नहीं होती ।। जिस्म के घाव...

अरमान रहे होंगे- सूरज राय सूरज

क़दमों की आहटों से अंजान रहे होंगे ये रास्ते कभी तो सुनसान रहे होंगे आँखों से लाश की, यूँ आँसू नहीं निकलते मुर्दा बदन में, ज़िंदा अरमान...

आभार करके आ गए- सूरज राय सूरज

आंसुओं पे शब्द का सिंगार करके आ गए । आँख का सारा नमक अशआर करके आ गए ।। आज अपने आप को देखा तो नज़रें झुक...

जैसा हूँ वैसा मुझको स्वीकार लिखो- सूरज राय सूरज

जिसका जैसा भी चाहो किरदार लिखो । सबसे अच्छा धंधा है अख़बार लिखो ।। ज़ालिम के क़दमों मेरी दस्तार लिखो । जो ऐसा कर ले उसको सरदार...

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