Sunday, August 18, 2019
Home Tags हिन्दी कविता

Tag: हिन्दी कविता

एक अहम सवाल- प्रमोद निराला

थाह लिया है हमने सागर की अतल/गहराईयों को चूम लिया है हमने व्योम की अलभ्य/ऊंचाईयों को बनाकर पनडुब्बी/बना लिया है पानी के भीतर भी/डगर बनाकर जहाज/बसा लिया है पानी के ऊपर...

धरती का चाँद- संजय वर्मा

दूधिया चाँद की रौशनी में तेरा चेहरा दमकता नथनी का मोती बिखेरता किरणे आँखों का काजल देता काली बदली का अहसास मानो होने वाली प्यार की बरसात तुम्हारी कजरारी आँखों से काली...

शहर के पेड़ ये- शैलेन्द्र

हैं शहर के पेड़ ये भीड़ में जो तन्हा खड़े हैं। पल भविष्य के अतीत हुये सूखकर पात भी पीत हुये बस सामाजिक शर्म के गोंद से हैं...

कुछ मैं तुम में बसी हूँ- रुचि शाही

चाह के भी दूर नहीं जा पाई मैं तुमसे न जाने कौन सा बंधन था जो मेरे हृदय के तारों को बांधे हुये था तुमसे न जाने...

सिन्दूरीवर्णी रंजित सूरज के- आईना शाण्डिल्य

अंतर्मन में अंकित, गह्वर स्मृतियों सा कल्पित-पात्र कोई हो तुम, बस दूर खड़ी ये सोचूँ, तुम में खो कर, तुम सी हो कर मुक्तिबोध को पावन कर दूँ,...

मैं कौन ख़ुशी जी लूँ बोलो- श्वेता सिन्हा

मैं कौन ख़ुशी जी लूँ बोलो किन अश्क़ो को पी लूँ बोलो बिखरी लम्हों की तुरपन को किन धागों से सी लूँ बोलो पलपल हरपल इन श्वासों से आहों...

बहुत तन्हा है तेरे बिन रात का मौसम- रुचि शाही

***** बोझ कामचोर और बेकार कहा जाता है पढ़ा लिखा भी हो तो गंवार कहा जाता है इतना रसूख दिलाता है ये पैसा आदमी को रुपये जेब में...

सुनो अब तुम सजन- श्वेता राय

पूछते हो मीत! क्या अनुबंध है? क्या हमारे बीच में संबंध है? कह रही जो वो सुनो अब तुम सजन| दीप पर जलता पतंगा हो मगन|| झर रहे...

Recent Posts