Sunday, August 25, 2019
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Tag: Hindi ghazal

जो मिल गया किरदार- शीतल वाजपेयी

वो जिसका नूर आँखो में उजाला बन के आया है उसी ने चाँद-तारे टाँक के अम्बर सजाया है भला ये कैसे तय होगा कि हम में...

सोये ख्वाबों को- श्वेता सिन्हा

सोये ख्वाबों को जगाकर चल दिए आग मोहब्बत की जलाकर चल दिए खुशबू से भर गयी गलियाँ दिल की एक खत सिरहाने दबाकर चल दिये रात भर चाँद...

ऐ ख़ाक-ए-बदन- सूरज राय सूरज

माँ, बाप, बहन, भाई, सगे यार बहुत थे अये ख़ाक-ए-बदन, तेरे चमत्कार बहुत थे सबकी तरह मुझे भी दिया सांस का सफ़र फिर मेरी रहगुज़र में ही...

जाने कौन सा दर्द वो छुपा रहा था- पुष्प प्रेम

हंस हंसकर सबको दिखा रहा था जाने कौन सा दर्द वो छुपा रहा था गम तो खैर खुद उसका था मगर किसी और के नाम से बता...

सुधर गये क्या हमको सुधारने वाले- सुधीर पांडेय व्यथित

अना के जालो गर्द को बुहारने वाले। जीस्त के गेसू ख़म को सँवारने वाले।। इन दिनों चुप हैं शेख़ी बधारने वाले सुधर गये क्या हमको सुधारने वाले।। ज़ह्न...

दिल टाँक दूँ मैं तुम्हारे गालों में- श्वेता सिन्हा

तुम ही तुम छाये हो ख़्वाबों ख़्यालों में दिल के शजर के पत्तों में और डालों में लबों पे खिली मुस्कान तेरी जानलेवा है चाहती हूँ दिल...

दिल की कभी सुनी जाए- पूनम प्रकाश

काश सब की दुआ सुनी जाए खाली झोली नहीं कोई जाए क्या ज़रूरी है दर्द की दौलत, बारहा मेरे नाम की जाए हाए जाने ये इन अँधेरों की, कब...

मुहब्बत हो अगर दिल में तो- स्नेहलता नीर

कभी तलवार के वारों से, बख्तर टूट जाता है मुहब्बत हो अगर दिल में तो, ख़ंजर टूट जाता है वफ़ा करके मिले जब बेवफ़ाई और रुसबाई हृदय...

ठिकाना ढूंढता हूँ- चंद्र विजय प्रसाद

साजिशों के शहर में ठिकाना ढूंढता हूँ गुज़रे हुए जमाने का फसाना ढूंढता हूँ कहूँ किससे चल पड़ा सफ़र में अकेला क्यों गर्दिशों में खुद अफसाना ढूंढता...

मैं जिसमें उतर गया कल शब- रामरज फ़ौजदार फौजी

ज़मीर ही था, मैं जिसमें उतर गया कल शब अचानक आईना देखा तो डर गया कल शब हरे भरे हुए शादाब दरख़्तों की हवा चली भी यूँ...

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