Sunday, February 24, 2019
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Tag: Hindi poetry

अपना कृष्ण खुद ही बनना होगा- नीरज त्यागी

बन्द पलके खोल कर जिसको चलना आ गया। समझ लो बस अब उसको जीवन जीना आ गया।। बार बार,गिर गिर कर जिसको सम्हलना आ गया। बस समझ...

जनता- डॉ राजेश दुबे

ईद मनाती सरकारें बलि का बकरा है जनता मुफ्तखोर हैं लूट रहे जेब कटाती है जनता... आँसू पोंछ रहे घड़ियालों के जिनके दाँतों बीच फसी पूँछ हिलाती है जनता... फटे जेब पर जश्न...

प्रीत धरा की- अनिता सैनी

निशा निश्छल मुस्कुराये प्रीत से, विदा हुई जब भोर से तन्मय आँचल फैलाये प्रीत का, पवन के हल्के झोंको से कोयल ने मीठी कुक भरी, जब निशा मिली थी...

कभी खुद से मिले क्या- शीतल वाजपेयी

मिले हो हर किसी से पर कभी खुद से मिले क्या? कभी पूछा है खुद से हैं कोई शिकवे-गिले क्या? कभी तनहाइयों में बैठ कर खुद...

ऐ फगुनिया- रंजीत कुमार तिवारी

ऐ फगुनिया! कितनी भाग्यशाली है तू कि ऐसा अप्रतिम प्रेमी पाया जिसके प्यार ने शाहजहाँ मुमताज ताजमहल को भी शरमाया एक नई इबारत लिख दिया मोहब्बत के फलक पर तेरे प्रेमी...

प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो- स्नेहलता...

मात् वीणा-पाणि हमको ज्ञान का उपहार दे दो प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो वेदना है हर हृदय में, कंठ रोदन से...

मेरी कलम कुछ कहती है- माया

मेरी कलम कुछ कहती है थोड़ी शिकायत, थोड़ी बगावत थोड़ी नाराज़ रहती है होकर के गुमसुम कभी मेरी कलम मुझसे कहती है कागज़ पर चलते-चलते भावनाएँ तुम्हारी कहते-कहते थक जाती हूँ,...

भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

भारत सब देशों से न्यारा जन गण मन का है अति प्यारा जाति धर्म हैं भिन्न हमारे फिर भी मिलकर रहते सारे कर्मवीर हम हैं रखवारे सबका सबसे भाईचारा भारत...

दिल टाँक दूँ मैं तुम्हारे गालों में- श्वेता सिन्हा

तुम ही तुम छाये हो ख़्वाबों ख़्यालों में दिल के शजर के पत्तों में और डालों में लबों पे खिली मुस्कान तेरी जानलेवा है चाहती हूँ दिल...

यादों की परछाइयां- अनुराधा चौहान

कुछ लम्हे दिल में बस जाते तो मिटाएं नहीं मिटते यादों में उनके चित्र सदा ज़िंदा ही हैं रहते बचपन से लेकर जवानी कुछ यादें नई पुरानी कुछ धुंधले होते...

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