Friday, April 26, 2019
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ज़िंदगी के पन्ने- अनुराधा चौहान

आ बैठती हूँ झील के किनारे चेहरे पर मुस्कान लेकर रोज टूटती बिखरती हूँ बीते लम्हों की याद लेकर जाने किस स्याही से लिखे हैं मेरी किस्मत के पन्ने खुशियां...

धरती- मिली अनिता

धरा हो आप धरती हो हर इंसान के माँ की प्रतिबिंब आपसे मिलती है!! जिसने सिर्फ़ सहा है कुछ भी नहीं कहाँ है! निर्मलता आप दोनो में ही खुटकुट कर...

वेदना- अनिता सैनी

समय के साथ बह गई जिंदगी ख़ामोश निगाहें ताकती रह गई किये न उन के क़दमों में सज़दे हर बार इंतज़ार में रह गई सज़दे न करेगें उन...

रिश्तों की मिट्टी- रुचि शाही

रिश्तों की मिट्टी इतनी भी उपजाऊ नहीं होती कि हमारे रोपे गए तमाम आशाओं और उम्मीदों के पौधों को सींच पाए उन्हें जीवन दे पाए कुछ अपेक्षाओं के छोटे-छोटे मासूम पौधे लगते...

बेवफा हो गया वो- स्नेहलता नीर

बेवफा हो गया वो मुझे छोड़कर चल दिया बेरहम मेरा दिल तोड़कर कर यकीं अज़नबी पर किया इश्क था आज पछता रही बेसबब ज़ख्म पा क्या सिला है...

ज़िंदगी उलझी-उलझी- पूनम प्रकाश

क्या वाइज़ और क्या दीवाने रूठ गए। जो भी आए थे समझाने रूठ गए। शिद्दत मेरी प्यास की देखी ही थी और दुनिया के सारे मैखाने रूठ...

क़ातिलाना ये अदायें- प्रिया सिन्हा

क़ातिलाना ये अदायें उफ़ तुम्हारी शान की अब खुदारा क्या मनाएं ख़ैर अपनी जान की।। एक इक सजदा भी अपना नाम उसके कर दिया जिस निगाहें ख़ास ने इस दर्द की...

कब मासूमियत पे उसकी- सुरजीत तरुणा

कब मासूमियत पे उसकी पड़ जाएंगी दर्दो-शिक़न की सलवटें वक़्त से ही पहले ये तो शायद उसको भी मालुम नहीं था बेफ़िक्री के आलम में गुज़रा था बचपन उसका और बरह्ना-पा लिए वो यूँ ही घर...

नज़र भर कर तुम्हें देखूँ- स्नेहलता नीर

बनाया क़ल्ब को मैंने तुम्हारा आशियाना है मेरा दिल हो गया उल्फ़त में दिलवर अब दिवाना है हुई गुलज़ार धरती साँस महकाती पवन संदली चले आओ सजन...

मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम- स्नेहलता नीर

खिल गए हैं फूल कोयल छेड़ती सरगम। मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम। कर रहा है नवसृज ऋतुराज धरती पर। मन प्रफुल्लित मन रहा त्यौहार...

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