Sunday, February 24, 2019
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प्रथम बार श्रृंगार किया था- आशुतोष असर

अपने अंदर के सुख को जब मन से एकाकार किया था प्रकृति ने मेरी उस क्षण ही प्रथम बार श्रृंगार किया था दूर धरा को गगन...

लफ़्ज़ मेरे तौलने लगे- श्वेता सिन्हा

अच्छा हुआ कि लोग गिरह खोलने लगे। दिल के ज़हर शिगाफ़े-लब से घोलने लगे।। पलकों से बूंद-बूंद गिरी ख़्वाहिशें तमाम। उम्रे-रवाँ के ख़्वाब सारे डोलने लगे।। ख़ुश देख...

दिल में कितने राज हैं- स्नेहलता नीर

दिल बना फ़ौलाद का मुश्किल से घबराता नहीं धार उल्टी वक़्त की हो खौफ़ ये खाता नहीं अब तराने भी मुहब्ब्त के कोई गाता नहीं प्यार में...

वो सपने फिर सजाना चाहता है- प्रिया सिन्हा संदल

मुक़द्दर को दिखाना चाहता है। ख़ुदी को आज़माना चाहता है।। बिखेरे वक़्त की आँधी ने जो भी वो सपने फिर सजाना चाहता है।। लगे है दाग जितने हारने...

कभी खुद से मिले क्या- शीतल वाजपेयी

मिले हो हर किसी से पर कभी खुद से मिले क्या? कभी पूछा है खुद से हैं कोई शिकवे-गिले क्या? कभी तनहाइयों में बैठ कर खुद...

प्रिय-प्रेम की पाती- स्नेहलता नीर

अब ऋतु वसंती और सँग में फाग का है आगमन प्रिय-प्रेम की पाती पवन भी पढ़ रही होकर मगन हैं आम सब बौरा रहे, कोयल मधुर...

क्या हुआ- सूरज राय सूरज

कोने में घर के मकड़ी के जालों का, क्या हुआ अनसुलझे ज़िंदगी के सवालों का क्या हुआ दिल के चमन के, पत्ते तलक खौफ़जदा हैं उन हसरतों...

प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो- स्नेहलता...

मात् वीणा-पाणि हमको ज्ञान का उपहार दे दो प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो वेदना है हर हृदय में, कंठ रोदन से...

भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

भारत सब देशों से न्यारा जन गण मन का है अति प्यारा जाति धर्म हैं भिन्न हमारे फिर भी मिलकर रहते सारे कर्मवीर हम हैं रखवारे सबका सबसे भाईचारा भारत...

हम अपनेपन से दूर हुए- शीतल वाजपेयी

सुविधाओं के लालच में हम अपनेपन से दूर हुये मिले बनावट के सब रिश्ते जब बचपन से दूर हुये बस इक छोटे से कमरे में हम...

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