Wednesday, June 26, 2019
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प्रीत की चाह लिये- श्वेता सिन्हा

मदिर प्रीत की चाह लिये हिय तृष्णा में भरमाई रे जानूँ न जोगी काहे सुध-बुध खोई पगलाई रे सपनों के चंदन वन महके चंचल पाखी मधुवन चहके चख पराग बतरस...

सोये ख्वाबों को- श्वेता सिन्हा

सोये ख्वाबों को जगाकर चल दिए आग मोहब्बत की जलाकर चल दिए खुशबू से भर गयी गलियाँ दिल की एक खत सिरहाने दबाकर चल दिये रात भर चाँद...

लफ़्ज़ मेरे तौलने लगे- श्वेता सिन्हा

अच्छा हुआ कि लोग गिरह खोलने लगे। दिल के ज़हर शिगाफ़े-लब से घोलने लगे।। पलकों से बूंद-बूंद गिरी ख़्वाहिशें तमाम। उम्रे-रवाँ के ख़्वाब सारे डोलने लगे।। ख़ुश देख...

गणतंत्र मतलब हमारा संविधान, हमारी सरकार, हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य

विविधतापूर्ण संस्कृति से समृद्ध हमारे देश में अनेक त्योहार मनाये जाते हैं। बहुरंगी छवि वाले हमारे देश के राष्ट्रीय त्योहार ही हैं, जो जनमानस...

वो गुम रहे- श्वेता सिन्हा

वो गुम रहे अपने ही ख़्यालों की धूल में करते रहे तलाश जिन्हें फूल-फूल में गीली हवा की लम्स ने सिहरा दिया बदन यादों ने उनकी छू...

फूल, भँवर, तितली, चाँद में तुम- श्वेता सिन्हा

जाते हो तो साथ अपनी यादें भी लेकर जाया करो पल पल जी तड़पा के आँसू बनकर न आया करो चाहकर भी जाने क्यों खिलखिला नहीं पाती...

गुजरते सर्द लम्हों की- श्वेता सिन्हा

शाख़ से टूटने के पहले एक पत्ता मचल रहा है। उड़ता हुआ थका वक्त, आज फिर से बदल रहा है गुजरते सर्द लम्हों की ख़ामोश शिकायत पर दिन ने कुछ...

देर तक तड़पा रही है उनकी याद- श्वेता सिन्हा

तन्हाई में छा रही है उनकी याद देर तक तड़पा रही है उनकी याद काश कि उनको एहसास होता कितना सता रही है उनकी याद एक कतरा धूप...

केक- श्वेता सिन्हा

आज केक आयेगा... आज केक आयेगा... केक आयेगा न पापा? मेरे चेहरे पर मासूम आँखें टिकाकर तनु ने पूछा। मैंने मुस्कुराकर हामी भरी तो उसकी आँखों में...

मैं कौन ख़ुशी जी लूँ बोलो- श्वेता सिन्हा

मैं कौन ख़ुशी जी लूँ बोलो किन अश्क़ो को पी लूँ बोलो बिखरी लम्हों की तुरपन को किन धागों से सी लूँ बोलो पलपल हरपल इन श्वासों से आहों...

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