Monday, May 27, 2019
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मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम- स्नेहलता नीर

खिल गए हैं फूल कोयल छेड़ती सरगम। मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम। कर रहा है नवसृज ऋतुराज धरती पर। मन प्रफुल्लित मन रहा त्यौहार...

बहे लहू की देखो धार- स्नेहलता नीर

सीमा पर फिर आज कर दिया शैतानों ने नरंसहार। लाशों के टुकड़े बिखरे हैं, बहे लहू की देखो धार। नाम पाक नापाक इरादे, गया हिन्द का...

विचरण करता निर्जन में- स्नेहलता नीर

होता दुखी, बहाता आँसू, अस्त व्यस्त है क्रंदन में मन के आगे मनुज मौन है, विचरण करता निर्जन में करता नहीं कभी मन पावन, तन को...

ऋतुओं में प्यारा बसंत- स्नेहलता नीर

ख़ुशियाँ ले आया अनंत है। ऋतुओं में प्यारा बसंत है। ऋतुओं में न्यारा बसंत है। पतझर को आ दूर भगाया, कोंपल जगी जिया मुस्काया। धानी धरा बना सरसाया, मलय समीरण...

प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो- स्नेहलता...

मात् वीणा-पाणि हमको ज्ञान का उपहार दे दो प्रार्थना है लेखनी को विमल कर, नव धार दे दो वेदना है हर हृदय में, कंठ रोदन से...

भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

भारत सब देशों से न्यारा जन गण मन का है अति प्यारा जाति धर्म हैं भिन्न हमारे फिर भी मिलकर रहते सारे कर्मवीर हम हैं रखवारे सबका सबसे भाईचारा भारत...

मुहब्बत हो अगर दिल में तो- स्नेहलता नीर

कभी तलवार के वारों से, बख्तर टूट जाता है मुहब्बत हो अगर दिल में तो, ख़ंजर टूट जाता है वफ़ा करके मिले जब बेवफ़ाई और रुसबाई हृदय...

जीवन का संगीत लिखे- स्नेहलता नीर

उम्मीदों की डोर थाम दिल, जीवन का संगीत लिखे घिरा दुखों में फिर भी, नर तन पाया अनुग्रहीत लिखे नेह-गेह के पनघट रीते, हर दिल बंजर...

पथ के शूल कुचलता चल- स्नेहलता नीर

जीवन की राहें अनजानी, निशि-दिन राही चलता चल मार्ग कंटकाकीर्ण मिले तो पथ के शूल कुचलता चल मंजिल तेरी दूर, मगर रख प्यास लक्ष्य को पाने...

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